किसी की जिंदगी खुशियों से भरपूर है किसी की जिंदगी खुशियों से भरपूर है
जब अपने बचपन की मासूमियत से महरुम थे हम। जब अपने बचपन की मासूमियत से महरुम थे हम।
मैं पग पर पग रख चल रहा हूँ, मैं नई उमंगों की तरंगों सूर्योदय देख रहा हूँ! मैं पग पर पग रख चल रहा हूँ, मैं नई उमंगों की तरंगों सूर्योदय देख रहा हूँ!
बह रही है अश्को की नदियां, बेबसी क्या है तनहा, फिर मेरी मुस्कुराहट है बनावटी क्यों, बोल दे फ़कीरे, बह रही है अश्को की नदियां, बेबसी क्या है तनहा, फिर मेरी मुस्कुराहट है बनावटी क्य...
दिग्गज नेता अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए, जनता ने उनके गढ़ में ही पराजय के स्वाद चखाए। दिग्गज नेता अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए, जनता ने उनके गढ़ में ही पराजय के स्वा...
पूछ रही हूँ खुद ही से कि कौन हूँ मै ? पूछ रही हूँ खुद ही से कि कौन हूँ मै ?